Power of positive thinking

                     
                       Power of positive thinking
 मनुष्य के जीवन में सकारात्मक सोच बहुत ही महत्वपूर्ण रोल अदा करती है इसको समझने से पहले अपने को जानना होगा कि सोच कितने प्रकार की होती है 1.)  सकारात्मक सोच।
   2.)  नकारात्मक सोच।
1.) सकारात्मक सोच ---  जब एक मनुष्य अपने लिए या फिर अपनों के लिए  या अपनी परिस्थितियों के  अच्छा सोचता है या फिर अच्छे ढंग से कार्य करने की ऊर्जा रखता है तो वह इंसान अपने जीवन में बहुत ही कामयाबी हासिल कर पाता है क्योंकि उसने अपने माइंड को ऐसा ही बना लिया है कि उसको हर एक नेगेटिव परिस्थिति में भी उसको सकारात्मकता दिख ही जाती है।
 जैसे यदि कोई इंसान बार बार सोचता है कि 
1.)  यह काम में कर सकता हूं।
2.)  मेरा जन्म जीतने के लिए ही हुआ है
3.) मुझे जीवन में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।
4.)  मैं हर एक परिस्थिति में  असंभव को भी संभव बनाने की उर्जा रखता हूं।
5.)  मुझे हर हाल में जीतना है और अपने जीवन में आगे बढ़ना है
2.)  नकारात्मक सोच-- कई लोगों की बचपन से ही नकारात्मकता की आदत पड़ जाती है इस आदत को मिटाना बहुत ही कठिन कार्य होता है और इसका पूरा का पूरा क्रेडिट उनके माता-पिता को जाता है क्योंकि जब एक आदमी छोटा होता है तब बचपन में उसे क्या सिखाया गया है नेगेटिव ही आप पॉजिटिव  यह पूरा माता-पिता के ऊपर डिपेंड करता है क्योंकि जब उसको बचपन से ही गरीबी दर्द दुख पीड़ा निराशावादी दिखाई दे या उसको सुनाई दिए हो तो वह भी अपने जीवन में आगे बढ़ने से पहले राइट डिसीजन नहीं ले पाता है और उसको भी यही सब चीजें दिखाई देती है ।

सकारात्मक सोच को अच्छे से समझने के लिए या इसकी शक्ति को समझने के लिए आइए एक उदाहरण के साथ समझते है।
 एक बार अकबर के दरबार में सारी धन दौलत व संपत्ति खत्म हो गई  जिसकी वजह  से अकबर परेशानी में आ गया!  पूरे दरबार में यह बात फैल गई की के राज्य में कोई भी साधन संपत्ति नहीं  बची है अगर कोई मदद करना चाहे तो कर  सकता है अंत में मरने  बीरबल  से  पूछा कि तुम्हारे दरबार में सारी संपत्ति  खत्म हो गई है  अब  आप ही कोई  समाधान बताइए तो बीरबल ने जवाब दिया की  हमारे राज्य में एक  हीरे का  व्यापारी रहता है जोकि हमारे  राज्य की मदद करने के लिए तैयार है जब व्यापारी को राज्य दरबार में लाया गया  और मदद के लिए बोला तो  वह खुशी खुशी  राजी हो गया
 और दरबार में ट्रक भरकर सोना तथा हीरे दे दिए!।
जब  इतने सारे हीरे  तथा सोना देखकर राजा ने अर्थात अकबर ने उस व्यापारी से पूछा कि इतनी बड़ी व्यापार में महामंदी सोने  पर यहां तक की राज्य में संपत्ति   भी खत्म होने के बावजूद भी तेरे पास  इतने  हीरे कहां से आए!
तो व्यापारी ने जवाब दिया  की माफ करिएगा महाराज मैं एक  व्यापारी  हो हूं तथा मैं हर एक परिस्थिति  से वाकिफ हूं हर नेगेटिव परिस्थिति मैं भी कुछ ना कुछ पॉजिटिव ढूंढ ही लेता हूं तो मैंने यह हीरे व सोना आपके ही राज्य से टैक्स चोरी  करके का रखें है  तो यह अभी आज दरबार के ही काम आए, जब  अकबर ने टैक्स चोरी की बात सुनी तो उसे गुस्सा आ गया तथा अपने  मंत्रियों से  कह कर उसे दरबार में घोड़े की लीद  उठाने के लिए काम पर लिया, यह उसकी टैक्स चोरी की  सजा  थी! ऐसी सजा मिलने पर भी उस व्यापारी ने  खुशी खुशी काम को एक की आदत बना ली क्योंकि  सकारात्मक सोच वाला व्यापारी था कोई नकारात्मक प्राणी नहीं!! 6 महीने बाद फिर से अकबर के  राज्य में वापस सारी संपत्ति खत्म हो गई क्योंकि मार्केट  मंदा था तथा सभी ने बिना कुछ काम किए ही उन हीरे व सोने को बेच के खाया परंतु काम धंधा कुछ नहीं किया जिसकी वजह से वापस  भूखमरी आ गई। भुखमरी की  वजह से अकबर का दिमाग  हिल गया उसने फिर से बीरबल से सलाह मांगी तो  अर्थात बीरबल ने पास उसी व्यापारी बुलाने का सुझाव दिया तो उस व्यापारी पर अकबर पहले से ही  गुसा था और बीरबल की सुनकर  फिर से बोला कि उससे तो  सारा धन संपत्ति ले लिया है  वह तो अब अपने ही  राज्य में घोड़े की लीद उठाने का कार्य करता है उसके पास अब कुछ नहीं होगा क्योंकि उससे सारा वसूल लिया है फिर भी अकबर की बात मानकर उस व्यापारी को  बुला लेता है राज्य दरबार में  और  पूछता है कि क्या तुम दरबार में से करना चाहते हो क्योंकि  हमारा  राज्य  फिर  से  खाली  हो गया है तो व्यापारी खुशी खुशी बोला कि  महाराज  पहले से ज्यादा  ले लीजिए हीरे तथा सोना!  अब अकबर का दिमाग पहले से भी खराब हो गया था पहले तो वह  खुला व्यापारी था ,  परंतु अभी आज के दरबार में नौकरी करते हुए भी इतने सोना  कहां से लाया !
 जब यह बात पूछी गई दो व्यापारी ने  जवाब दिया कि महाराज में एक  व्यापारी हूं हर परिस्थिति में  सकारात्मकता खोजता हूं जब आपने घोड़े की उठाने के यह काम पर रखा तो वहां पर भी  आपके दरबार के लोग भ्रष्टाचारी है इसलिए वह जब भ्रष्टाचार करते थे मैं उनको  बोलता था इस भ्रष्टाचार से मुझे भी कुछ हिस्सा दो वरना राजा को अर्थात अकबर को बता दूंगा तो मैंने अपना हिस्सा लेकर यह इकट्ठा किया है
तो यह होता है सकारात्मकता का फायदा!!

अकबर उस टाइम नकारात्मकता की सोच रखता था क्योंकि मार्केट मंदा था तो वह भी सोचता था कि अभी धन पैसा कमाना इकट्ठा करना सेविंग करना आदि पॉसिबल नहीं है लेकिन वो व्यापारी एक रियल व्यापारी था जो कि हर परिस्थिति में सकारात्मकता ढूंढ लेता था इसीलिए वह अपने जीवन में कभी रुका नहीं हमेशा आगे बढ़ता रहा और मुसीबत आने पर अपने राज्य के भी काम आया
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