विजुलाईजेशन का विज्ञान
SCIENCE OF VISUALISATION
विजुलाइजेशन का विज्ञान
विजुलाइजेशन हमारे मन से बहुत नजदीक से जुड़ा है इसलिए विजुलाइजेशन के विज्ञान को समझने से पहले मन के बारे में जानते हैं
मन - अपना मन अपनी सबसे बड़ी अदृश्य शक्ति है विज्ञान की भाषा में कहें तो ऊर्जा। वैज्ञानिकों ने मन के काम करने की अवस्थाओं के दो प्रकार बताए है।
जब हम जागते हैं तब जो मन काम करता है वह जागृत मन होता है तथा जो मन 24 घंटे काम करता है वह अर्धर्जागृत मन कहलाता है
जागृत मन - अपने सभी बौद्धिक काम जागृत मन से करते हैं ।
जागृत मन निर्णायक मन है, यह पसंद और नापसंद करता है, तर्क करता है, सवाल करता है ,हमेशा उधेड़बुन में व्यस्त रहता है ।
अर्धजागृत मन - हमारी सभी आदतों का मूल कारण हमारा अर्धजागृत मन है और अर्धजागृत मन को जो जानकारी या सूचना बार-बार दी जाए उन्हें वह वास्तविक रूप में स्वीकार कर लेता है अर्धजागृत मन स्वयं को मिलने वाली जानकारी को या सूचनाओं को स्थाई रूप से संग्रहित कर लेता है जैसे श्वास का आना - जाना, खून का संचरण, पाचन क्रिया जैसी अपने शरीर की स्वयंसंचालित प्रक्रियाएं अर्धजागृत मन के निर्देश से होती है । यह मन स्थान और काल के बंधन से मुक्त होता है आपका अर्धजागृत मन आपकी भावनाओं को प्रभावित करता है अर्धजागृत मन अपना सृजनात्मक मन है
अर्धजागृत मन की शक्ति - जागृत मन अपने जागृत मन की तुलना में कई गुना शक्तिशाली है क्योंकि इसमें हमारे संजोगो के सृजन की क्षमता है । अभी तक हमारे संजोग और जो जागृत मन द्वारा ही उपलब्ध कराए गए हैं ।
संजोगो का सृजन किस तरह होता है - हमें अच्छे लगने वाले संजोग हो या बुरे लगने वाले अवसर को इनका सृजन किस तरह होता है इस प्रक्रिया को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं
संजोगो का सृजन स्टेप 1 - हमारे आसपास हम जो कुछ देखते हैं उनके चित्र हमारे अर्धजागृत मन में छप जाते हैं जो कुछ सुनते हैं उन वाक्य तथा शब्दों के चित्र बीच बनते हैं और अर्ध जागृत मन के ऊपर छप जाते हैं इस तरह जागृत मन के पास अच्छे - बुरे चित्रों को पहुंचाने का काम जाने अनजाने में हम सतत करते रहते हैं ।
संजोगो का सृजन स्टेप 2 - जागृत मन चित्र के रूप में बार-बार मिलने वाली सत्य - असत्य जानकारियों को स्वीकार कर लेता है और उन्हें वास्तविक समझने रखता है
संजोगो का सृजन स्टेप 3 - वास्तविक रूप में स्वीकार की गई यह सूचना अपना अर्ध जागृत मन स्थाई रूप से संग्रह करके रखता है छोटी से छोटी जानकारी भी हमेशा के लिए संग्रहित रखता है।
संजोगो का सृजन स्टेप 4 - अब वह अपने पास जानकारी या सूचनाओं का संग्रह जिस प्रकार का होता है हमें उसी तरह प्रभावित करने लगता है ऐसी परिस्थिति में अगर हमारे पास संग्रह की गई जानकारी दी हुई तो हमें अच्छे ढंग से प्रभावित करता है और यदि खराब हुई तो वह हमें बुरे ढंग से प्रभावित करता है धीरे-धीरे हमारे ऊपर या अपना प्रभाव बढ़ाने लगता है।
- यह अपने विचार को प्रभावित करने लगता है
- यह अपनी भावनाओं को प्रभावित करने लगता है।
- यह हमारे व्यवहार को प्रभावित करने लगता है।
जब इस सूचना का प्रभाव हमारे ऊपर हावी होने लगता है तब यह उसी प्रकार के विचारों के माध्यम से अपने दिमाग मे खयाल आने लगते है , इससे अपना दिमाग उसी की और अग्रसर होता है जिस प्रकार के विचार बनते है ।
एक बात हमेशा आपके और जागृत मन में संग्रहित चित्रों जैसे की भावनाएं अपने मन में भी जागृत होने लगती है यह भावनाएं जैसी होती है वैसी ही वस्तुएं घटनाएं और वैसे ही व्यक्ति हमारी जिंदगी में आकर्षित करते हैं अपना शरीर भी अपने भी जागृत मन के द्वारा किए गए चित्र संग्रह के अनुसार काम करने लगता है हम वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं
जिससे सेहत अच्छी बनती है या फिर बिगड़ जाती है जैसा आपने मन में व्यवहार करते हैं वैसे ही हम को प्रणाम भी मिलते है
उदाहरण के लिए एक एक्सरसाइज करते हैं---
घनश्याम जी को देख लीजिए घनश्याम जी क्या हुआ उनके बचपन में ऐसी हुई कि ऐसी परिस्थितियां हुई कि उनको बस दुख गरीबी अर्चना पीड़ा दर्द इन सभी घटनाओं से होकर गुजरना पड़ा जिसके चलते घनश्याम जी हमेशा टेंशन में रहते थे टेंशन होने के कारण अपने जीवन में कभी भी ठोस फैसले नहीं ले सकते थे और ऊपर से वास्तव में बाजार के अंदर मंदिर चल रही थी जिसके चलते आसपास के सभी व्यापारी उनके ऊपर चढ़ते थे उसका कारण यह रहा था कि वह अर्थात घनश्याम जी उनके जीवन में कभी एक नया घर भी नहीं बना पाए अपने व्यापार छोटे-मोटे व्यापार होने के कारण वह अपना घर का परिवार का खर्चा भी सही ढंग से नहीं उठा सकते थे तो घर कहां से बनाएंगे बेचारे और उनको व्यापार में कभी सफलता नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण यही था कि वह नेगेटिव प्रणाली के आदमी थे। अब घनश्याम जी के दिमाग से विचार इसी प्रकार के आते हैं कि वह नेगेटिव बातें ही करते हैं जिसके कारण उनको रिजल्ट मिलते हैं वह भी नेगेटिव ही मिलते हैं और कुल मिलाकर समझा जाए सोचा जाए तो उनकी पूरी जिंदगी उन्होंने की टीम में से निकाल दी और वह कभी पॉजिटिव नहीं हो पाए इसका मेन कारण था उनके आसपास का वातावरण और बचपन में कही, सुनी, देखी गई बातें।
THANKS FOR BEING WITH US
KLMD Motivation



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