Every lady is a gentle woman besides man too
बिहार की किसान चाची ने जैविक खेती से किया देश का नाम रोशन
अपनी कर्मठता और कौशलता के दम पर मुज़्ज़फ़रपुर की राजकुमारी देवी ने साबित कर दिया कि महिलाएं किसी भी काम मे पुरुषों से कम नही है। साधारण सी दिखने वाली इस महिला ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नही की होगी।
समाज को बदलने का लिया संकल्प
राजकुमारी देवी यानी किसान चाची का जन्म बिहार के मुज़्ज़फ़रपुर जिले के सरैया में हुआ था। राजकुमारी देवी गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थी, जिसकी वजह से कक्षा 10वी तक कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके परिवार ने शादी करवा दी थी। राजकुमारी देवी के पति भी किसान थे, लेकिन उस समय उनके गांव व आसपास के गांवों में केवल गांजा और तम्बाकू की खेती हुआ करती थी
लेकिन ऐसे में परिवार का खर्च चलाना काफी मुश्किल हुआ करता था । घर का खर्च सही तरीके से न होने के कारण परिवार में झगड़े हुआ करते थे। शादी के 9 साल भी राजकुमारी की गोद सुनी थी। जिसकी वजह से उन्हें परिवार और समाज के अत्यचार व ताने सुनने व झेलने पड़ते थे। इसके अलावा महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार को देख कर दुखी हो जाती थी। तब उन्होंने समाज की सोच बदलने का दृढ़ निश्चय किया, जिन्हें तब के समय मे यह लगता था कि महिलाएं केवल घर की चार दिवारी में रहने के लिए ही पैदा हुई है।
काम करने पर ससुराल वालों ने किया जमकर विरोध
राजकुमारी देवी ने सोचा कि क्यों न नशे की थी के बजाय कुछ दूसरी खेती की जाए, जिससे लोगों को फायदा भी हो सके । तब उन्होंने समाज की खरी-खोटी सुनते हुए फलों और सब्जियों की खेती करना शुरू किया। परंतु समस्या यह है कि कोई भी व्यक्ति इन सामान को या उत्पाद को खरीदने के लिए राजी नहीं हुआ, तब राजकुमारी देवी ने पहले तो साइकिल चलाना सीखी तथा उसके बाद खुद ही इन उत्पाद को बाजार में जाकर बेचने लगी। परंतु इस दौरान उनके ससुराल वालों ने जमकर विरोध किया। क्योंकि उस वक्त घर की औरतें किसी भी काम के लिए घर से बाहर नहीं निकलती थी। समाज के इतना रोकने के बाद भी वह नहीं रुकी और लोगों की बिना परवाह किए अपने काम में जुट गई।
खेती की वजह लोगो ने उड़ाया माजक
गांव में पहली बार फलों और सब्जियों की खेती होनी शुरू हुई थी। ऐसे में इसके लिए गांव वालों को मनाना बहुत ही मुश्किल काम था परंतु राजकुमारी देवी ने लोगों को गांजे और तंबाकू के फायदे बनाने शुरू किए या अगर दूसरी भाषा में कहूं तो तंबाकू और गांजे से जो नुकसान होता है उस नुकसान के बारे में गांव वालों को अपनी काबिलियत के दम पर जताना शुरू किया तथा उनको प्रेरणा देना शुरू किया, और फलों सब्जियों की खेती का फायदा ही फायदा बताया गया। ऐसे में कई लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन तब भी राजकुमारी देवी ने अपना प्रयास जारी रखा। राजकुमारी देवी अपने इस काम को और आगे बढ़ाने के लिए पूछा विश्वविद्यालय पहुंची और खेती तथा फूड प्रोसेसिंग का बकायदा प्रशिक्षण लिया ।
वहा उन्हें खेती में उन चीजों को उगाने क्या आईडिया मिला जो जल्दी उग जाए और पूरा फायदा मिले। प्रशिक्षण लेने के बाद वापस गांव आकर अपने आसपास की औरतों को ट्रेन करना शुरू किया, फिर फिर ओल का अचार मुरब्बे - डिब्बे में भरकर बेचना शुरू किया।
जैविक खेती के बताए फायदे
राजकुमारी देवी को अचार मुरब्बे आदि से धीरे-धीरे अच्छा मुनाफा होने लगा, जिसके बाद राजकुमारी देवी ने अनेक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर अपने साथ मिला लिया। हां की इस दौरान उन्हें कई तकलीफों का सामना अकेले ही करना पड़ा। परिवार और समाज के रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए वह अपने कदम को आगे की तरफ बढ़ाती चली गई । राजकुमारी देवी ने कई प्रकार के अचार और मुरब्बे बनाने शुरू किए लोग उनके अचार को पसंद भी करने लगे थे। राजकुमारी देवी मेले में जाकर अपने उत्पाद से बनाए हुए अचार, मुरब्बे का स्टॉल लगाने लगाती थी और साथ ही जैविक खेती के फायदे भी बताती थी। जिसके बाद उनकी तकनीक को धीरे-धीरे दूसरे गांव के लोग भी अपनाने लगे, और वहीं से वो किसान चाची के नाम से मशहूर हो गई ।
सबसे पहले लालू यादव जी ने सरैया मेले में साल 2003 में उनको सम्मानित किया । इसके बाद साल 2007 में नीतीश कुमार ने "किसान श्री" से सम्मानित किया। इसके अलावा राजकुमारी देवी के काम से प्रसन्न होकर अमिताभ बच्चन जी ने केबीसी शो में भी बुलाया तथा पद्मश्री से सम्मानित किया है । राजकुमारी देवी आश्रम सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। किसी वक्त पर अकेली खेतों में काम करने वाली महिला आज हजारों महिलाओं के साथ मिलकर उनके पैरों पर खड़ा कर रही है
राजकुमारी देवी की कहानी हमारे लिए काफी प्रेरणादायक है, क्योंकि ऐसे समय में उन्होंने देश का नाम रोशन किया जब महिलाएं घर से बाहर भी नहीं निकलती थी । अगर एक साधारण से महिला ऐसा कुछ कर सकती अपने सपने को साकार कर सकती तो आप और हम क्यों नहीं । उठिए जागिए और तब तक मत रुको जब तक कि आपको आपका लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता है स्वामी विवेकानंद जी के द्वारा कही गई है लाइन आज भी गुनाह इतना ही मोटिवेट करती है जितना पहले करते थे और संकल्प लीजिए एक लक्ष्य बनाइए जो चाहिए उस लक्ष्य के प्रति अपने आप को पूरा समर्पित कर दीजिए।
THANKS FOR BEING WITH US
KLMD MOTIVATION
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