Inspiration life story of TIJANBAI
इतनी परेशानी के बावजूद भी महिला बिना शिक्षा के आगे बढ़ सकती है हम क्यो नही।
छत्तीसगढ़ की लोक कला "पंडवानी" को दिलाई देश-विदेश में दिलाई एक नई पहचान। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता का मूल मंत्र व्यक्ति का अटूट विश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति होता है, ऐसे में छत्तीसगढ़ी तीजन बाई एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने अपनी काबिलियत के बल पर पंडवानी संस्कृति को विदेश में पहचान दिलाई।
तेजन बाई ने नही देखा स्कूल का दरवाजा
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई के गनियारी गांव में हुआ था। तीजन बाई अपने माता - पिता की पांच सन्तानो में सबसे बड़ी थी। उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। तीजन बाई जिस समुदाय में पैसा हुई थी,
उनका मुख्य पेशा चिड़िया पकड़ना, शहद बटोरना, चटाइयां और झाड़ू बनाना था। उस समय लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी लगाई गई थी। ऐसे में तीजन बाई कभी स्कूल का दरवाजा भी नही देख पाई थी, तीजन बाई अपने बचपन से ही अपने नाना ब्रजलाल महाभारत की कहानियां गाते सुनाते देखती। तीजन ने जब पहली बार छुप छूप कर अपने नाना से द्रोपदी चिर हरण का प्रसंग सुनाया , जिसे सुनने के बाद वो भावुक हो उठी। तीजन के नाना ने एक बार महाभारत के प्रसंग को सुनते हुए उन्हें देख लिया था।
परिवार वालो ने लगा दी थी बंदिश
नाना को जब तीजन बाई की रुचि के बारे में मालूम हुआ तो वह तीजन बाई का पंडवानी के बारे में प्रशिक्षण देने लगे। मगर तीजन की मां को उनका गाना बिल्कुल भी पसंद नहीं था, उनके परिवार वालों ने बंदिश लगा दी। उनकी मां तीजनबाई से कठोर सुलुक से पेश आने लगी, समाज ताना मारने लगा और तीजन बाई को कमरे में बंद कर दिया जाता और खाने को भी नहीं दिया जाता था। तीजनबाई कई दिनों तक कमरे में बंद रहती थी, लेकिन इन सबके बावजूद भी तीजनबाई ने कभी अपने कदम को पीछे नहीं हटने दिया, क्योंकि पंडवानी के अलावा उन्हे न कुछ दिखता और न कुछ सूझता था। समाज के लगातार विरोध के बावजुद भी अपने नाना एवं गुरु से पंडवानी का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।
12 साल की उम्र में हुई थी तीजन बाई की शादी
तीजन बाई के हुनर को सबसे पहले उनके नाना ब्रजलाल ने पहचाना था। समाज के लगातार विरोध और घर वालो की कटु आलोचनाओं के बावजूद भी उनके नाना तीजन बाई को पंडवानी गाना सिखाते थे। उनके नाना महाभारत की कहानिया तीजन बाई को सुनाते थे, जिसे वह बहुत ही ध्यान पूर्वक सुनकर याद करती जाती थी लेकिन तीजन बाई की ज़िंदगी मे कठिनाईया उनका इम्तिहान लेने के लिए खड़ी थी, महज 12 साल की उम्र में तीजनबाई की शादी उनके परिवार वालो ने कर दी थी, ससुराल वालो को यह कतई मंजूर नही था की वो पंडवानी गाएं। उस समय केवल मर्दो को ' कापालिक पंडवानी गाने की इजाजत थी। लेकिन तीजनबाई को पंडवानी से दूर रखना मुश्किल ही नही नामुमकिन था । रात के खाने के बाद तीजनबाई का कार्यक्रम आयोजित किया जाता तथा जिसमे शामिल होने के लिए तीजनबाई चुप चाप घर से निकल जाया करती थी।
पति ने धक्के मारकर निकाला घर से बाहर
तीजनबाई भीम से जुड़ी कोई कहानी सुना रही थी, तभी उनके पति अचानक उन्हें मारने के लिए पहुच गए थे। लेकिन उस समय तीजनबाई ने अपने पति का विरोध किया, लिहाजा, उन्हें अलग होना पड़ा। जिसके बाद ससुराल वालों ने उन्हें धक्के मारकर घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। लेकिन तीजनबाई हिम्मत हारने वाली महिलाओं में से नही थी, पड़ोसियों की मदद से अपने लिए एक झोपड़ी का निर्माण करवाया और दुसरो के घरों से बर्तन मांग कर लाई तथा खाने का इंतेजाम किया। तीजनबाई ने अपने घर का खर्च चलाने के लिए दातुन तथा लकड़ी के सामान बनाकर बेचना शुरू किया। तीजनबाई ने अपने पति का दरवाजा कभी नही खटकया।
और अपनी काबिलियत के बल पर आगे की तरफ बढ़ने लगी।
इंदिरागाँधी के सामने प्रस्तुति देने का मिला था मौका
तीजनबाई को महज 13 साल की उम्र में अपने पास के गांव चंदखुरी में मंच पर प्रस्तुति करने का मौका मिला।
कार्यक्रम के बाद स्रोता घण अपनी पसंद के अनुसार पैसे और चावल दिया करते थे। लेकिन उस मस्य खुले मंच महिलाओं के लिए प्रस्तुति देना बहुत ही मुश्किल काम हुआ करता था, लोग ताने मारते और तरह तरह की फब्तियां कसते। एक दिन प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने तेजन को सुना,जिससे वो बहुत ही खुश हुए। जिसके बाद भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के सामने प्रस्तुति देने का मौका मिला । तीजनबाई को अब पहचान मिलना शुरू हो गयी, उन्होंने इसके बाद अब देश विदेश में जाकर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। जीवन के इतने संघर्ष ने तीजनबाई ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा। पंडवानी गायिका तीजनबाई को पद्मभूषण पुरस्कार और भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी के द्वारा पद्मभूषण से नवाजा जा चुका है।
तीजनबाई एक ऐसी महिला थी जिन्होंने अपनी काबिलियत के बल पर हजारों मुसीबतों के बावजूद भी पंडवानी जैसी कला को लोगो के बीच ज़िंदा रखने के लिए हर सम्भव कोशिश जारी रखी । उन्होंने जीवन मे कभी हार नही मानी, उन्हें अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा था, की एक दिन इसी कला के जरिये वो भारत का नाम रोशन करेगी।
मेरा कहना है उपरोक्त तीजन बाई की कहानी सुनकर अपने आपको खुद को मोटिवेट करिए तथा जीवन में एक संकल्प लीजिए कि हमें भी कुछ नया करना है अगर किसी के सहारे नहीं जीना है तो खुद के पैरों पर खड़ा होना ही पड़ेगा ।

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